जल-संकट(लातूर- शहर)-1: यह हमारी सभ्यता के अंत की शुरुआत है

Hillele

Writer: Devesh Tripathi

A Hillele Report

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याद कीजिये 2016 के बीत गए महीनों को. हैदराबाद केन्द्रीय

विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या से शुरू

हुआ साल बढ़ता हुआ पहुंचा जेएनयू और फिर देशद्रोह से लेकर

राष्ट्रवाद की बहसों ने देश के दिलों-दिमाग पर कब्ज़ा जमा लिया.

इस बीच इसी देश का एक हिस्सा सूखते-सूखते इतना सूख गया कि

देश की नज़र में ही नहीं आया. यह कहना मुश्किल है कि उसे

बारिश की कमी ने इतना सुखाया या हमारी उपेक्षा ने. इस उपेक्षा

को मैं हमारी उपेक्षा ही कहूँगा, बाक़ी सरकारों की बात क्या ही

करना. सरकारों की नीयत पर भरोसा हो,हमें इतना सीधा नहीं

होना चाहिए.

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आप शीर्षक देखकर सोच रहे होंगे कि मैंने शुरुआत ही अंत के साथ

कर दी है पर यकीन मानिए मैं मजबूर हूँ यह लिखने के लिए. मैं

यह मानकर चल रहा हूँ कि आपको मालूम होगा मराठवाड़ा क्षेत्र

के सूखे के…

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